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प्रोटोकॉल क्या होता है

Protocol Ka Matlab Kya hai – What is Protocol in Hindi  चलिए  समझते हैं कि  Protocol kya hota hai ? ProtoCol Ka Matlab Kya hai ? What is Protocol in Hindi  . Computer प्रोटोकॉल कम्युनिकेशन के नियम के संग्रह को  कहते हैं । जब भी कोई सूचना या Data एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसमिट या प्रेषित होती है तो यह  प्रेषण या transmission कुछ नियमो के अनुसार  होता है प्रोटोकॉल काम कैसे करते है –   How Protocol Works in Hindi   जिस तरह जब दो मनुष्य मिलते है तो वे एक दुसरे से बात करने के लिए किसी ना किसी भाषा का इस्तेमाल करते है. जब वे बात करते है तो उन्हें सामने वाले की बात को समझने के लिए जरूरी नहीं है कि उन्हें व्याकरण के सभी नियमों का पता हो, किन्तु फिर भी वे बात को समझ जाते है. वे हल्के फुल्के नियमों और कम शब्दकोष के जरिये भी अंदाजा लगा लेते है कि सामने वाला क्या कह रहा है. लेकिन कंप्यूटर प्रोटोकॉल में बिलकुल उल्टा है ,  अगर दो कंप्यूटर के बीच संचार हो रहा है तो उनके बीच शत प्रतिशत सही जानकारी डाटा ,  फिगर ,...

कैलाश मानसरोवर : जहां कण-कण में हैं शिव

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आइए हम आपको दर्शन करा रहे हैं कैलाश मानसरोवर के। मानसरोवर वही पवित्र जगह है, जिसे शिव का धाम माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर शिव-शंभु का धाम है। कैलाश पर्वत, 22,028 फीट ऊंचा एक पत्थर का पिरामिड, जिस पर सालभर बर्फ की सफेद चादर लिपटी रहती है। हर साल कैलाश-मानसरोवर की यात्रा करने, शिव-शंभु की आराधना करने, हजारों साधु-संत, श्रद्धालु, दार्शनिक यहाँ एकत्रित होते हैं, जिससे इस स्थान की पवित्रता और महत्ता काफी बढ़ जाती है।  मान्यता है कि यह पर्वत स्वयंभू है। कैलाश-मानसरोवर उतना ही प्राचीन है, जितनी प्राचीन हमारी सृष्टि है। इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जो ‘ॐ’ की प्रतिध्वनि करता है।इस पावन स्थल को भारतीय दर्शन के हृदय की उपमा दी जाती है, जिसमें भारतीय सभ्यता की झलक प्रतिबिंबित होती है। कैलाश पर्वत की तलछटी में कल्पवृक्ष लगा हुआ है।  कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम को रूबी और उत्तर को स्वर्ण रूप में माना जाता है।   पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह जगह कुबेर की नगरी है। यह...

सूर्य मंदिर अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड)

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ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर के बाद कटारमल सूर्य मंदिर सूर्य भगवान को समिर्पत देश का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। अल्मोड़ा शहर से 16 किमी दूर स्थित यह मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। मंदिर का परिसर 800 साल पुराना है, जबकि मुख्य मंदिर 45 छोटे-छोटे मंदिरों से घिरा हुआ है। हालांकि यह प्राचीन तीर्थ स्थल आज एक खंडर में तब्दील हो चुका है, बावजूद इसके यह अल्मोड़ा का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।कटारमल का सूर्य मन्दिर अपनी बनावट के लिए विख्यात है।  महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने इस मन्दिर की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  उनका मानना है कि यहाँ पर समस्त हिमालय के देवतागण एकत्र होकर पूजा अर्चना करते रहै हैं।  उन्होंने यहाँ की मूर्तियों की कला की प्रशंसा की है। कटारमल के मन्दिर में सूर्य पद्मासन लगाकर बैठे हुए हैं।  यह मूर्ति एक मीटर से अधिक लम्बी और पौन मीटर चौड़ी भूरे रंग के पत्थर में बनाई गई है।  यह मूर्ती बारहवीं शताब्दी की बतायी जाती है।  कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाद कटारमल का यह सूर्य मन्दिर दर्शनीय है।  कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाहर जो झलक है, वह कटारमल मन्दिर...

इक्कीसवीं सदी का भारत (2001-2100)

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इक्कीसवीं सदी का भारत (2001-2100) आज जो हम करते हैं, वही कल होगा। वर्तमान की नींव पर भविष्य खड़ा होता है। हर आने वाले कल में वर्तमान के द्वार से ही प्रवेश करते हैं। इसलिए कल के लिए वर्तमान का महत्व या भूमिका बहुत बड़ी होती है। यही बात हमारे देश भारत के लिए भी लागू होती है कि आज जो भारत है, वह कल का भारत होगा। आज का भारत कल का भारत है। हमारे भूतपूर्व युवा प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी ने एक बड़ा ही मोहक और आकर्षक नारा दिया था- ‘इक्कीसवीं सदी का भारत’। इस नारे का अर्थ यह हुआ कि हम यथाशीघ्र ही इक्कीसवीं सदी में पहुँच रहे हैं, अर्थात् आज के दस वर्षों बाद हम इक्कीसवीं सदी में होंगे तो, क्या होंगे, यह एक विचारणीय प्रश्न है। इस पर जब हम विचार करते हैं तो हम यह देखते हैं कि आज भारत की जो स्थिति और स्वरूप है, उससे कुछ ही भिन्न उसका स्वरूप है। यह आज से कुछ वर्षों बाद होगा अर्थात् इक्कीसवीं सदी का भारत आज से कुछ अवश्य मिलता जुलता भारत होगा। हम देखते हैं कि आज भारत वर्ष की जनसंख्या बेतहासा बढ़ती जा रही है। इस पर नियंत्रण पाना किसी के बस की बात नहीं हो रही है। यद्यपि सरकार से विभिन्न प्रक...
आयकर  (इनकम टैक्स) वह  कर  है जो सरकार लोगों की आय पर आय में से लेती है। आयकर एक कर कि सरकारों को अपने क्षेत्राधिकार के भीतर सभी संस्थाओं द्वारा उत्पन्न वित्तीय आय पर लागू होता है। कानून के अनुसार, व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए तय है कि वे किसी भी करों देने या एक कर वापसी के लिए पात्र हैं हर साल एक आय कर रिटर्न फाइल करना होता है।आयकर धन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जिसे सरकार अपनी गतिविधियों निधि और जनता की सेवा करने के लिए उपयोग करता है।  यह प्रायः एक खास सीमा से अधिक आय वालों द्वारा अदा किया जाता है। उदाहरण के लिये भारत के बजट 2017-2018 के प्रावधान के अनुसार तीन  लाख रुपए से अधिक आय वाले व्यक्ति आयकर दाताओं की श्रेणी में आएँगें। तथा उन्हें आयकर अदा करना होगा। महिलाओं के लिए यह सीमा तीन लाख पचास हजार रुपए  है,और वरिष्ठ नागरिकों के लिए तीन लाख रुपए रखी गई है। कभी कभी एक खास रकम से ऊपर के आय वालों को अतिरिक्त कर भी देना होता है। मसलन वर्तमान  के बजट में  पचास लाख रुपये सालाना से ज़्यादा आय वालों को १०% प्रतिशत  सरचार्ज अतिरिक्त कर देना होगा । आ...
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मनोरंजन और संगीत

फूलदेई उत्तराखंड मै

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                              फूलदेई उत्तराखंड मै क्यों ख़ास है ?                                                                                                                                                                                                                                                     ...